चलो तेज़ाब फ़ेक दिया सो फ़ेक दिया। अब कुसूर भी बता दो। बस इतनी सी बात पर फूंक दिया चेहरा, तुम्हारा इज़हार था, मेरा इंकार था। शायद गलती मेरी थी। तुम्हारा प्यार देख न सकी, इतना पाक प्यार था। शायद समझ न सकी, अब अपनी गलती मानती हूँ । क्या अब अपना बनाओगे मुझको? क्या अब तुम अपनाओगे मुझको? मेरे गालो को देखना पसंद करोगे? जिन पर पड़े छालो से अब पानी निकलता हैं। मेरी आँखो मे आँखें डालकर देखोगे? जो अब अंदर धंस चुकी हैं। क्या कीमत अदा करू, जो तुने बदहाल किया हैं जो तुने जिस्म जलाकर मेरा,मेरी रूह का श्रृंगार किया हैं। मैंने शारीरिक दर्द के साथ जीना सीख लिया, लेकिन जिस तरह से समाज ने प्रतिक्रिया दी, उससेे ज्यादा दुख हुआ। मेरे अपने रिश्तेदारों ने मुझे देखना बंद कर दिया, जैसा कि मेरे दोस्तो ने किया। उसने मेरा चेहरा बदल दिया, मेरा दिल नहीं। उसने मेरे चेहरे पर एसिड फेंक दिया, मेरे सपने नहीं।

जाओ और उसे देखो, उसका चेहरा, उसकी आत्मा अभी भी शुद्ध है। एक मुस्कान अभी भी उसके होठों को रोशन करती है। वह सीखती है कि कैसे उसे उस दर्द के साथ जीना हैं। जाओ और उसे देखो, उसका चेहरा खो गया हो सकता है। अम्ल वर्षा के एक स्पर्श के साथ। उसकी सुंदरता अभी भी आपकी नस में खून की तरह जीवित है। और वह सौंदर्य अभी भी दिखाई दे रहा है, उस आंख से जो देखने से ज्यादा है। झुर्रीदार, उसकी आँखें अभी भी चमक रही हैं।

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