Feticide – Do not kill daughter

यहाँ तो कुदरत की बनाई कोख मे भी लड़कियों की जान सुरक्षित नहीं हैं।महिलाओ के गर्भ पर हमारी मनमानी कब तक? सुन नही पा रहा था कोई। पर वो गुजार लगा रही थी। आने दो मुझे पापा वो कोख मे से पुकार लगा रही थी। नवजात बेटियो के जिंदगी से छेड़खानी कब तक? क्या मान लूँ दुनिया मे आये बिना। मेरी माँ मुझसे प्यार नही करती। मेरी माँ से जीवन मांग सकू। क्या मुझको ये अधिकार नहीं। मैं तेरी किताब का एक पन्ना हूँ। उस पन्ने पे मेरी जान लिखी हैं। रह जाये अगर ये एक पन्ना। तो किताब को कोई हर्ज नहीं। तो कुछ घरो में कोख मे ही खत्म होती हैं। मरोड़ लो अभी विटप का एकमात्र अंश हू। वर्ना शाश्वत इस गर्भ मे पल रही विध्वंस हू। क्या वजह थी वो जान भी ना पायी? बेटी होने की सजा हैं। उसने पायी? रंगीन दुनिया भी वो ना देख पायी? बेटी थी शायद इसलिए जन्म न ले पायी? मैं भी छू सकती हूँ आकाश। एक मौके कि मुझे है तलाश। माँ चाहिए, पत्नी, चाहिए, बहन चाहिए। फिर बेटी क्यो नही चाहिए? कन्या भ्रूणहत्या की कीमत सबको चुकाना होगा, इसे रोकना है तो हमको आगे आना होगा।

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